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Thursday, August 15, 2013

सभी को इस स्वाधीनता दिवस पर बधाई-डा. मनमोहन सिंह

15-अगस्त-2013 08:42 IST
आज यकीनन ही खुशी लेकिन दिलों में दर्द भी
15 अगस्त 2013  को 67 वें स्वतन्त्रता दिवस पर लाल किले के सामने कुछ इस तरह का दृश्य था 


लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से जय हिन्द का जय घोष करते प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह 
आज प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने स्‍वतंत्रता दि‍वस 2013 के अवसर पर लाल कि‍ले के प्राचीर से देश को संबोधि‍त कि‍या । इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है - 

“मेरे प्यारे भारतवासियो, 

भाइयो-बहनो और प्यारे बच्चो, 

मैं आप सभी को इस स्वाधीनता दिवस पर बधाई देता हूँ। 

आज यकीनन ही खुशी का दिन है। लेकिन आज़ादी के इस त्यौहार पर हमारे दिलों में इस बात का दर्द भी है कि उत्तराखण्ड के हमारे भाई-बहनों को करीब दो महीने पहले भारी तबाही का सामना करना पड़ा। हमारी संवेदना और सहानुभूति उन सभी परिवारों के साथ है जिनको जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा । मैं आज उत्तराखण्ड की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इस मुश्किल की घड़ी में सारा देश उनके साथ है। हमारी सरकार जल्द से जल्द लोगों के उजड़े हुए घर दोबारा बसाने और बर्बाद हुए Infrastructure को फिर से बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से काम कर रही है। 

उत्तराखण्ड में कठिन परिस्थितियों में हमारी फौज़, अर्धसैनिक बलों और केन्द्र और राज्य सरकार के तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों ने आम लोगों के साथ मिलकर, घिरे हुए लोगों को राहत पहुंचाने का जो काम किया, वह तारीफ के काबिल है। हम ख़ास तौर पर Air Force, ITBP और NDRF के उन अधिकारियों और जवानों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने दूसरों को बचाने में अपनी जान कुर्बान कर दी। 

हमें इस बात का भी बेहद अफसोस है कि कल एक दुर्घटना में हमने अपनी पनडुब्बी INS Sindhurakshak को खो दिया। इस हादसे में 18 बहादुर नौसैनिकों के शहीद होने की आशंका है। यह नुकसान इसलिए और भी दर्दनाक है क्योंकि अभी हाल में हमारी Navy ने अपनी पहली Nuclear पनडुब्बी Arihant और Aircraft Carrier, INS Vikrant के रूप में दो बड़ी कामयाबियां हासिल की थीं। 

हम शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। साथ-साथ Navy की सफलताओं के लिए उन्हें मुबारकबाद भी देते हैं। 

भाइयो और बहनो, 

1947 में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में हमने आज़ादी हासिल की। उसके बाद के अपने सफर पर अगर हम ग़ौर करें तो पाएंगे कि हर दस साल पर हमारे देश में बड़े बदलाव आए हैं।

1950 के दशक में पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के नेतृत्व में एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में भारत ने अपने पहले कदम रखे। देश में Atomic Energy Commission, योजना आयोग और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं की स्थापना की गई जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्र निर्माण के काम में बहुत बड़ा योगदान दिया। पहली बार आम चुनाव कराए गए और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए पहली पंचवर्षीय योजना बनाने का सिलसिला शुरू किया गया। 

1960 के दशक में पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने नए-नए उद्योग और कारखाने लगवाए, नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू की और नए विश्वविद्यालय खोले। राष्ट्र निर्माण में विज्ञान और Technology के महत्व पर ज़ोर देकर उन्होंने इस प्राचीन देश को एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया। 

1970 के दशक में इंदिरा जी ने हमारे राष्ट्र का आत्मविश्वास बढ़ाया। इस दौरान हमने अंतरिक्ष में अपना पहला उपग्रह छोड़ा। हरित क्रांति ने पहली बार हमें अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्रदान की। 

राजीव गांधी जी ने अगले दशक में तकनीकी और आर्थिक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान Information Technology के क्षेत्र में हमारी प्रगति की नींव रखी गई। 

पंचायती राज संस्थाओं के महत्व पर ज़ोर दिया गया जिसकी वजह से आगे चलकर इन संस्थाओं को मज़बूत और अधिकार संपन्न बनाने के लिए हमारे संविधान में संशोधन हुआ। 

साल 1991 में हमने श्री नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व में एक बहुत बड़े आर्थिक संकट का सामना बख़ूबी किया और देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए आर्थिक सुधारों को अपनाया। उस समय इन सुधारों का कई राजनैतिक दलों ने विरोध किया। लेकिन ये सुधार राष्ट्र हित में थे और इसीलिए बाद में आने वाली सभी सरकारों ने उनको जारी रखा। साल 1991 से लेकर आज तक सुधारों की ये प्रक्रिया आगे बढ़ती रही है। 

भाइयो और बहनो, 

मेरा मानना है कि पिछला दशक भी हमारे देश के इतिहास में बहुत बड़े बदलावों का दशक रहा है। देश की आर्थिक समृद्धि जितनी इस दशक में बढ़ी है उतनी पहले किसी दशक में नहीं बढ़ी। लोकतांत्रिक ताकतों को बढ़ावा मिला है और समाज के बहुत से वर्ग विकास की प्रक्रिया से पहली बार जुड़े हैं। आम आदमी को नए अधिकार मिले हैं जिनकी बदौलत उसकी सामाजिक और आर्थिक ताकत बढ़ी है। 

भाइयो और बहनो, 

मई 2004 में पहली UPA सरकार सत्ता में आई थी। तब से लेकर आज तक हमने एक प्रगतिशील और आधुनिक भारत बनाने के लिए लगन और ईमानदारी से काम किया है। 

हमने एक खुशहाल भारत की कल्पना की है। एक ऐसा भारत जो सदियों से चले आ रहे गरीबी, भूख और बीमारी के बोझ से मुक्ति पा चुका हो। जहाँ शिक्षा के उजाले से अज्ञानता और अंधविश्वास के अंधेरे दूर हो चुके हों। 

जहां सामाजिक समानता हो और सबको एक जैसे आर्थिक अवसर प्राप्त हों। जहाँ समाज के किसी भी तबके को अन्याय और शोषण का सामना न करना पड़े। 

हमने एक ऐसे भारत का सपना देखा है जहाँ नौजवानों को रोज़गार के ऐसे अवसर मिलें जिनके जरिए वह राष्ट्र निर्माण के महान काम में योगदान कर सकें। 

हमने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज़ बुलंद करनी चाही है। हमने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहा है जिसे सारी दुनिया आदर और सम्मान के साथ देखे। 

इन सपनों को साकार करने के लिए हमने कई कदम उठाए हैं। लेकिन सफर लंबा है, अभी बहुत फासला और तय करना है। 

भाइयो और बहनों, 

अभी कुछ दिन पहले हमने Food Security कानून बनाने की दिशा में एक Ordinance जारी किया है। Food Security Bill अब संसद के सामने है और हमें उम्मीद है यह जल्द ही पास हो जाएगा। इस कानून का फायदा हमारे गांवों की 75 प्रतिशत और शहरों की आधी आबादी को पहुंचेगा। इसके तहत 81 करोड़ भारतीयों को 3 रुपये प्रति किलो चावल, 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 1 रुपये प्रति किलो मोटा अनाज मिल पाएगा। यह दुनिया भर में इस तरह का सबसे बड़ा प्रयास है। 

हम अपने किसानों की मेहनत की वजह से ही इस कानून को लागू कर पाए हैं। साल 2011-12 में हमारी अनाज पैदावार 25.9 करोड़ टन रही, जो एक रिकार्ड है। 

बिना तेज़ कृषि विकास के हम अपने गांवों में खुशहाली पहुंचाने का मक़सद हासिल नहीं कर सकते हैं। पैदावार बढ़ाने और किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलवाने के लिए हमने लगातार कोशिशें की है। फसलों के खरीद मूल्यों में पिछले 9 सालों में पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ोत्तरी की गई है। गेहूं और धान के खरीद मूल्य दुगुने से भी अधिक किए गए हैं। कई ऐसे राज्यों में जहां पहले अनाज की कमी रहती थी आज उनकी अपनी ज़रूरत से ज़्यादा पैदावार हो रही है। 

11 वीं पंच-वर्षीय योजना के दौरान कृषि विकास की औसत सालाना दर 3.6 प्रतिशत रही है जो 9वीं और 10वीं योजना, दोनों से ज्यादा है। 

अब ग्रामीण इलाकों में खुशहाली बढ़ने के साफ संकेत दिखाई देने लगे हैं। साल 2004 से लेकर 2011 तक प्रतिव्यक्ति उपभोग किया जा रहा सामान और सुविधाएं पहले के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़े हैं। 

ग्रामीण मजदूरी दर में भी कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। मनरेगा की बदौलत ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों गरीब लोगों को रोज़गार मिल रहा है। 

गरीबी को नापना एक मुश्किल काम है। गरीबी की परिभाषा को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हम गरीबी की चाहे कोई भी परिभाषा अपनाएं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि 2004 के बाद गरीबी कम होने की गति तेज़ हुई है। 

कई ऐसे राज्य, जो बहुत समय से पिछड़े माने जाते थे और जिनमें से कुछ को "बीमारू" कहा जाता था, आज तेज़ी से विकास कर रहे हैं। 

भारत में हर बच्चे को शिक्षा के अवसर देने के लिए हमने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है। आज देश में लगभग सभी बच्चे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे हैं। 

कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या पिछले नौ सालों में दोगुनी से भी ज़्यादा हो गई है। गरीबों और कमजोर तबकों के बच्चों को शिक्षा के अवसरों का फायदा दिलाने के लिए हमने बड़े पैमाने पर वज़ीफों के कार्यक्रम शुरू किए हैं। आज देश भर में 2 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को केन्द्र सरकार द्वारा वज़ीफे दिए जा रहे हैं। 

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नए संस्थान खोले गए हैं। जैसे 8 नए IIT, 7 नए IIM, 16 नई Central Universities और 10 नए NIT । Scientific Research को बढ़ावा देने के लिए भी नई संस्थाएं खोली गई हैं। Science की पढ़ाई में ज्यादा छात्रों को शामिल करने के लिए और विदेशों से भारतीय Scientists की वापसी आसान करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। 

लेकिन शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बहुत सारे स्कूलों में अभी भी पीने का साफ पानी, शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। शिक्षा की Quality को बेहतर बनाने की ज़रूरत है। इसके लिए अध्यापकों की training पर ज़्यादा जोर दिया जाना आवश्यक है। 

Mid-day-Meal योजना में रोज करीब 11 करोड़ बच्चों को स्कूलों में दोपहर का खाना दिया जा रहा है। यह योजना बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन इसको बेहतर तरह से लागू करना भी बहुत ज़रूरी है। बिहार में पिछले दिनों जो दर्दनाक हादसा हुआ वह देश में कहीं भी दोबारा नहीं होना चाहिए। 

2005 में हमने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरूआत की थी। इस मिशन के अच्छे परिणाम सामने आने लगे हैं। देश में Maternal Mortality Rate और Infant Mortality Rate दोनों तेज़ी से घटे हैं। पहले से कहीं अधिक बच्चों का जन्म आज अस्पतालों में होता है। टीकाकरण के प्रतिशत में भी काफी वृद्धि हुई है। 

पिछले दो सालों से हमारे देश में पोलियो का कोई भी केस सामने नहीं आया है। हमें एक ऐसे रोग को मिटाने में कामयाबी मिली है जो लाखों लोगों को अपंग बना दिया करता था। 

हमारे ग़रीब भाई-बहनों को अस्पतालों में इलाज के लिए मुफ्त बीमा सुविधा प्रदान कराने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना अब साढ़े तीन करोड़ परिवारों को फायदा पहुंचा रही है। 

हमने शहरी क्षेत्रों में भी Health Mission लागू किया है जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और उनमें सुधार आएगा। 

महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर करने के लिए, हमने महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित कानून को मज़बूत बनाया है। 

Infrastructure यानि सड़कों, रेलगाड़ी, बिजली उत्पादन, Civil Aviation, बंदरगाहों और Telecom जैसे क्षेत्रों में भी पिछले 9 सालों में काफी तरक्की हुई है। गांवों को जोड़ने वाली प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2 लाख किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। सैंतीस हजार Kilometer से ज़्यादा नए Highway बनाए गए हैं जिनसे व्यापार और यात्रा अब ज़्यादा आसान हो गए हैं। चालीस से ज़्यादा हवाई अड्डों का निर्माण या नवीनीकरण किया गया है। सन् 2004 में सिर्फ 7 प्रतिशत लागों के पास telephone connection थे। आज 73 प्रतिशत लोगों को यह सुविधा प्राप्त है। ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत 2 से बढ़कर 40 हो गया है। बिजली उत्पादन में रिकार्ड बढ़ोत्तरी हुई है। 

भाइयो और बहनो, 

हाल के महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में यह बात चर्चा में रही है कि पिछले साल हमारी विकास दर कम होकर 5% रह गई है। यह बात सच है और हम इस हालत में सुधार लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ हमारा देश ही अकेला आर्थिक कठिनाईयों का सामना नहीं कर रहा है। पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए पिछला साल मुश्किल भरा रहा है। यूरोप के बड़े देशों में इस वक्त मंदी चल रही है। दुनिया भर में हर जगह निर्यात बाज़ारों की स्थिति में गिरावट आई है। सभी विकासशील देशों को मंदी का सामना करना पड़ा है। 

मेरा मानना है कि भारत में धीमे विकास का दौर बहुत दिन नहीं चलेगा। पिछले 9 सालों में हमारी अर्थव्यवस्था में औसतन 7.9 प्रतिशत सालाना की बढ़ोत्तरी हुई है। विकास की यह रफ्तार अब तक किसी भी दशक में हुई प्रगति से कहीं ज्यादा है। 

भाइयो और बहनो, 

आज दुनिया के देश एक दूसरे से जितना जुड़े हुए हैं उतना पहले कभी नहीं रहे। हमने अपनी विदेश नीति के जरिए यह कोशिश की है कि भारत को इस बात का पूरा फायदा मिले। दुनिया की बड़ी ताकतों से पिछले 9 सालों में हमारे संबंध लगातार सुधरे हैं। पूर्व और दक्षिण पूर्व Asia में स्थित दस ASEAN राष्ट्रों के साथ हमारी Look East Policy के अच्छे नतीजे सामने आए हैं, खासकर आर्थिक मामलों में। हमारी यह भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ हमारी दोस्ती बढ़े। लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए यह ज़रूरी है कि वह अपनी सरज़मीन और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे। 

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति में सुधार हुआ है। 2012 में और इस साल कुछ राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा की चिंताजनक घटनाओं के बावजूद, पिछले 9 साल सांप्रदायिक सद्भाव की दृष्टि से अच्छे गुजरे हैं। आतंकवादी और नक्सली हिंसा में भी कमी आई है। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में हमें लगातार सावधानी बरतने की ज़रूरत है। समय-समय पर हो रहे नक्सली हमलों को पूरी तरह रोकने में हम सफल नहीं हो पाए हैं। छत्तीसगढ़ में पिछली 25 मई को जो नक्सली हिंसा हुई वह भारत के लोकतंत्र पर एक सीधा हमला था। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर हाल में हमारे जवानों पर कायरतापूर्ण हमला किया गया। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे। 

भाइयो और बहनो, 

सरकार के काम को ज़्यादा संवेदनशील, पारदर्शी, और ईमानदार बनाने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें से मैं सिर्फ दो का ज़िक्र यहां करना चाहूंगा। 

RTI कानून के जरिए आम आदमी को अब सरकारी कामकाज के बारे में पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी मिल रही है। इस कानून का इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर, हर स्तर पर हो रहा है। यह कानून अक्सर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को सामने लाता है और सुधार का रास्ता खोलता है। मुझे यकीन है कि आने वाले समय में RTI की वजह से सरकारी कामकाज में और सुधार आएगा । 

हमने संसद में लोकपाल बिल प्रस्तुत किया है। लोक सभा ने इसे pass कर दिया है और अब इस पर राज्य सभा विचार कर रही है। यह कानून हमारी राजनैतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। 

भाइयो और बहनो, 

हमने पिछले दशक में एक लंबा सफर तय किया है। लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। बदलाव का जो सिलसिला हमने शुरू किया है उसे आने वाले वक्त में जारी रखा जाएगा। 

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, तेज़ आर्थिक विकास हमारे देश के लिए बेहद ज़रूरी है। गरीबी दूर करना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा करना – यह सब तेज़ आर्थिक विकास के बगैर मुमकिन नहीं है। पिछले 9 साल में हमने आर्थिक विकास की जो औसत रफ्तार हासिल की है उससे हमारे देश की क्षमताओं का पता चलता है। लेकिन इस वक्त देश के आर्थिक विकास की दर में कमी आई है। हम इस कमी को दूर करने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं। 

उद्योगों के लिए सरकारी मंज़ूरियों की प्रक्रिया को तेज़ करने, देश में उद्योग और व्यापार के लिए बेहतर माहौल बनाने और निवेश को बढ़ाने के लिए हमने हाल ही में कई कदम उठाए हैं। बड़ी परियोजनाओं की मंजूरियों की प्रक्रिया में मदद करने के लिए एक विशेष cell की स्थापना की गई है। Cabinet Committee on Investment रुकी हुई परियोजनाओं की अड़चनें दूर करने का काम कर रही है। 

बिजली उत्पादन बढ़ाने के रास्ते में कोयले की आपूर्ति एक समस्या बन गई थी। इसको हमने काफी हद तक सुलझा लिया है। 

आने वाले महीनों में Infrastructure के क्षेत्र में बहुत सी बड़ी परियोजनाओं पर हम काम शुरू करने वाले हैं। इनमें 2 नए बंदरगाह, 8 नए हवाईअड्डे, नए Industrial Corridors और रेल परियोजनाएं शामिल हैं। 

Foreign Direct Investment को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में हमने कई क्षेत्रों में ऐसे निवेश की सीमा बढ़ाई है और इसकी प्रक्रिया को आसान बनाया है। 

निवेश बढ़ाने की इन कोशिशों के अच्छे नतीजे हमें अगले कुछ महीनों में साफ देखने को मिलेंगे। इससे आर्थिक विकास की रफ्तार तेज़ होगी, रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और infrastructure में भी सुधार आएगा। 

भाइयो और बहनो, 

Food Security कानून बनने के बाद उसे प्रभावी ढंग से लागू करना हमारी प्राथमिकताओं में से एक रहेगी। इस दिशा में हमने राज्यों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। Public Distribution System के Computerization के काम में तेज़ी लाई जाएगी। 

Mid-day-Meal Scheme में सुधार लाए जाएंगे। बच्चों को स्कूल में मिल रहा भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ साफ सुथरे ढंग से बना हुआ होना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए हम ठोस कदम उठाएंगे। 

Skill Development के क्षेत्र में शुरुआत में हम उतनी अच्छी प्रगति नहीं कर पाए जितनी चाहते थे, लेकिन अब इसमें तेज़ी आई है। हमने कुछ महीने पहले National Skill Development Authority का गठन किया है। हम जल्द ही एक नई योजना शुरू करेंगे जिसके तहत उन नौजवानों को लगभग 10 हज़ार रुपये की राशि दी जाएगी, जिन्होंने सफलतापूर्वक नई Skills हासिल की हैं। इस योजना से अगले 12 महीने में करीब 10 लाख नौजवानों को फायदा पहुंचेगा। 

अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए Multi-Sectoral Development Programme में हाल ही में सुधार लाए गए हैं। अब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। 

Minor Forest Produce के लिए खरीद मूल्य निर्धारित करने की स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। इससे हमारे आदिवासी भाई-बहनों को लघु वन उपज के सही दाम मिलेंगे। इस योजना को हम जल्द-से-जल्द लागू करेंगे। 

आदिवासी भाई-बहनों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति और उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर के बारे में सही जानकारी हासिल करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की Report से हमें उनके लिए बेहतर योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। 

हम अपने देश में बहुत सी समस्याओं को बेहतर Technology के ज़रिए हल कर सकते हैं। इसकी एक मिसाल है आधार योजना। इस योजना के तहत इस साल के आख़िर तक पचास करोड़ लोगों को अपनी पहचान साबित करने का जरिया मिलेगा और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उनको सहूलियत पहुंचेगी। इसके ज़रिए हम करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकों की सुविधाओं का लाभ दे पाएंगे। 

भाइयो और बहनो, 

एक आधुनिक, प्रगतिशील और Secular देश में तंग और सांप्रदायिक ख्यालों की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। ऐसी सोच हमारे समाज को बांटती है और हमारे लोकतंत्र को कमज़ोर करती है। हमें इसे रोकना होगा। हमें अपनी संस्कृति की उन परंपराओं को मज़बूत करना होगा, जो हमें अन्य विचारधाराओं के प्रति सहनशील होना और उनका सम्मान करना सिखाती हैं। मैं आज सभी राजनैतिक दलों, समाज के सभी वर्गों और आम जनता से इस दिशा में प्रयास करने की अपील करता हूँ । 

भाइयो और बहनो, 

कुछ देर पहले मैंने कहा था कि आज़ादी के बाद के हर दशक में भारत में बड़े परिवर्तन आये हैं। हमें आज यह सोचना है कि आने वाले दस सालों में हम किस तरह का परिवर्तन चाहते हैं। 

पिछले दस सालों में जैसी प्रगति हमने की है यदि हम उसे आगे भी जारी रखें तो वह वक्त दूर नहीं जब भारत को ग़रीबी, भूख, बीमारी और अशिक्षा से complete मुक्ति मिल जाएगी। हमारा भारत खुशहाल होगा और उसकी खुशहाली में सभी नागरिक बराबर के शरीक होंगे चाहे उनका धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा कुछ भी हो। 

इसके लिए हम सबको मिलकर देश में राजनैतिक स्थिरता, सामाजिक एकता और सुरक्षा का माहौल भी बनाना होगा। 

आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा भारत बनाने के लिए अपने आपको फिर से समर्पित करें। 

प्यारे बच्चों, अब आप मेरे साथ मिलकर तीन बार बोलिए… 

जय हिन्द जय हिन्द - जय हिन्द ।”  (PIB)
***
शरत/रतनानी/नवनीत/शाहबाज/सनोज/सतीश/लालमणी

Friday, May 3, 2013

भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी की वार्षिक आमसभा

03-मई-2013 19:40 IST
राष्‍ट्रपति का युवाओं/युवतियों से स्‍वैच्छिक रक्‍तदान करने का आह्वान
राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज राष्‍ट्रपति भवन सभागार, नई दिल्‍ली में भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी (आईआरसीएस) और सेंट जॉन एम्‍बुलेंस (इंडिया) की वार्षिक आमसभा के रस्‍मी सत्र में हिस्‍सा लिया। इस अवसर पर उन्‍होंने स्‍वयंसेवियों और सेंट जॉन एम्‍बुलेंस (इंडिया) के केंद्रों को समर्पित भावना से की गई उनकी सेवाओं के लिये छह पदकों तथा चार शील्‍ड्स से सम्‍मानित किया। 

इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने मानवता के लिये उल्‍लेखनीय सेवायें करने वाले सभी पदक विजेताओं को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि रेड क्रॉस ने अपने 150 वर्षो के इतिहास में मानवता, न्‍याय, तटस्‍थता, स्‍वतंत्रता, स्‍वयंसेवा, एकता और सार्वभौमिकता के बुनियादी मूल्‍यों को बरकरार रखा। उन्‍होंने कहा कि भारत में भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी और सेंट जॉन एम्‍बुलेंस सन् 1920 से मानवीय सेवाओं के मामले में हमेशा अग्रणी रहे हैं और अपने कार्यक्रमों के माध्‍यम से उन्‍होंने अपनी पहुंच बढ़ायी है। उन्‍होंने नर्सिंग स्‍क़ूलों, वृद्धाश्रमों, तपेदिक कार्यक्रमों, आपदा राहत और तैयारियों तथा बच्‍चों और युवाओं को सकारात्‍मक दृष्टिकोण सिखाने में अहम् भूमिका निभायी है। उन्‍होंने कहा कि इनके प्रयासों से लाखों लोग लाभांवित हुये हैं। 

राष्‍ट्रपति ने युवाओं और यु‍वतियों से बड़ी तादाद में आगे आने और स्‍वैच्छिक रक्‍तदान के अभियान में अपना योगदान देने के लिए कहा। उन्‍होंने कहा कि इस महत्‍वपूर्ण सामाजिक सेवाओं के लिए हमारे सभी युवाओं को संवेदनशील बनाना बेहद जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि हमें ये सुनिश्चित करने की कोशिश करनी चाहिए कि प्रत्‍येक इंसान की रक्‍त की जरूरत पूरी हो सकें। इस अवसर पर केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य परिवार कल्‍याण मंत्री तथा पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ के राज्‍यपाल सहित अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति भी उपस्थित थे। (PIB)

वि.कासौटिया/रीता/गीता-2208

Monday, April 29, 2013

इंस्‍टैंट कॉफी संयंत्र का उद्घाटन

29-अप्रैल-2013 12:57 IST
डी पुरनदेश्‍वरी ने वियतनामी नेताओं से बातचीत की 

वाणिज्‍य और उद्योग राज्‍यमंत्री डॉक्‍टर डी पुरनदेश्‍वरी ने वियतनाम में कल और आज विभिन्‍न कार्यक्रमों में हिस्‍सा लिया। हो ची मिन्‍ह शहर में उन्‍होंने भारतीय और वियतनामी उद्यमियों को संबोधित किया। इस बैठक में वियतनाम में भारत के राजदूत श्री रंजीत राय और 40 उद्यमियों ने हिस्‍सा लिया। 

वियतनाम के डक लेक प्रांत में डॉक्‍टर डी पुरनदेश्‍वरी ने इंस्‍टैंट कॉफी संयंत्र का उद्घाटन किया। इसे सीसीएल प्रोडक्‍स इंडिया लिमिटेड ने तीन सौ करोड़ रूपये की लागत से स्‍थापित किया है। उद्घाटन समारोह में वियतनाम में भारत के राजदूत सहित वियतनाम के वेस्‍टर्न हाइलैंड की संचालन समिति की उप-प्रमुख श्री त्रि जुआन होआ, डक लेक प्रांत की पीपुल्‍स कमेटी की उपाध्‍यक्ष माई हुआन, कु क्‍वीन जिला समिति के उपाध्‍यक्ष एन गुवेन नामचुंग और अन्‍य वियतनामी नेता मौजूद थे। सीसीएल प्रोडक्‍ट्स इंडिया लिमिटेड के अध्‍यक्ष श्री चल्‍ला राजेन्‍द्र प्रसाद और एन गुआन कॉफी कंपनी के अध्‍यक्ष सहित कई भारतीय वियतनामी और अंतर्राष्‍ट्रीय प्रति‍निधि उपस्थित थे।

डॉक्‍टर डी पुरनदेश्‍वरी ने व्‍यापार और निवेश के परस्‍पर हित के मामलों पर वियतनामी नेताओं से बातचीत की। बातचीत में भारत की ओर से श्री रंजीत राय के अलावा वाणिज्‍य विभाग में संयुक्‍त सचिव श्री सिद्धार्थ तथा अन्‍य अधिकारियों ने भाग लिया। (PIB)
वि.कासोटिया/गांधी/सोनिका-2075

Wednesday, January 9, 2013

प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक

उद्देश्‍य विभिन्‍न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना
विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने लिया भाग
प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक कल कोच्चि में हुई। विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने इसमें भाग लिया। बैठक में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि, वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्री आनंद शर्मा, विदेश मंत्री श्री सलमान खुर्शीद, मानव संसाधन मंत्री श्री एम.एम. पल्‍लम राजू, योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉक्‍टर मोंटेक सिंह आहलुवालिया और केन्‍द्र सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। 

बैठक में जिन प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया, उनमें श्री करण एफ. बिलीमोरिया, श्री स्‍वदेश चटर्जी, सुश्री इला गांधी, लॉर्ड खालिद हमीद, डॉक्‍टर रेणु खाटोर, श्री किशोर मधुबनी, श्री एल.एन. मित्‍तल, लॉर्ड भीखु छोटालाल पारेख, श्री सैम‍पितरोदा, तान श्री दातो अजीत सिंह, श्री नेविले जोसफ रोस, प्रोफेसर श्रीनिवास एस.आर.वर्धन और श्री युसूफाली एम.ए. शामिल थे। 

बैठक में प्रतिभागियों ने महत्‍वपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों और भारत पर होने वाले उनके प्रभावों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। इनमें वैश्विक आर्थिक स्थिति, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं, ऊर्जा सुरक्षा और एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रवृत्तियां जैसे मुद्दे शामिल थे। सदस्‍यों ने भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच तथा भारत और विभिन्‍न देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के बारे में भी अपने विचार प्रस्‍तुत किये। 

प्रधानमंत्री ने उनके दृष्टिकोण और रचनात्‍मक सुझावों के लिए सदस्‍यों का धन्‍यवाद किया। 

प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद का गठन वर्ष 2009 में हुआ था और हर साल इसकी बैठक होती है। इसका उद्देश्‍य दुनिया भर में फैले विभिन्‍न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना है, ताकि भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच सम्‍पर्कों के लिए व्‍यापक एजेंडा तैयार किया जा सके।(PIB) 
09-जनवरी-2013 12:52 IST
कोच्चि में प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक
मीणा/राजगोपाल/गीता-97

Wednesday, November 21, 2012

संसद का शीतकालीन सत्र 22 नवंबर, 2012 से

संसद का शीतकालीन सत्र (15वीं लोकसभा का 12वां सत्र और राज्‍यसभा का 227वां सत्र) बृहस्‍पतिवार, 22 नवंबर 2012 को शुरू हो रहा है। यह सत्र विधायी कार्यों की आवश्‍यकताओं को मद्देनजर रखते हुए 20 दिसंबर, 2012 को समाप्‍त होगा। सत्र 29 दिन चलेगा और इस दौरान 20 बैठकें होंगी। 

सत्र में जरूरी विधायी कार्य किए जाएंगे, जिनमें वित्‍तीय विधायी कार्य, पूरक मांगें और वर्ष 2012-13 के लिए आम बजट के अनुदान शामिल हैं। 

शीतकालीन सत्र 2012 के विधायी कार्यों को अंतिम रूप देने के लिए संसदीय कार्य मंत्री श्री कमलनाथ ने विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ 16 नवंबर, 2012 को एक बैठक की। संसदीय कार्य राज्‍य मंत्रियों ने भी बैठक में हिस्‍सा लिया। श्री कमलनाथ ने इस संबंध में प्रेस सम्‍मेलन को भी संबोधित किया। उन्‍होंने कहा कि सरकार संसद के आगामी सत्र के दौरान विधायी कार्यों पर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास करेगी। (PIB)
20-नवंबर-2012 19:19 IST
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Sunday, September 23, 2012

सर्वधर्म श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन


Sat, Sep 22, 2012 at 1:42 PM
23 से 29 सितम्बर तक विशेष आयोजन रोहिणी, दिल्ली में 
नई दिल्ली:तुलसी संस्था के सौजन्य और सतगुरू दर्शन धाम के सहयोग से दिनांक 23 से 29 सितम्बर 2012 तक श्री हनुमान मंदिर, सैक्टर-6 रोहिणी, दिल्ली-85 में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। श्री अरविंद जी महाराज कथाव्यास होंगे। कथा दोपहर 3 बजे से प्रभु इच्छा (6 बजे) तक चलेगी। कार्यक्रम में दिगंबर नागा बाबा मांट मथुरा, महाराज चड़विंदा दास, श्री कंत महाराज एवंम देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले सर्वधर्म के संत महात्मा शिरकत करेंगे।तुलसी  की महासचिव कंचन गुप्ता और एक एनी वरिष्ठ पदाधिकारी अंकित राज गुप्ता की और से जरी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कार्यक्रम का शुभारम्भ सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा मंगल कलश यात्रा (23 सितम्बर प्रातः 8 बजे) द्वारा किया जायेगा। सतगुरू दर्शन धाम की संगत निशान साहब के साथ यात्रा में शामिल होगी। पहले दिन कथा का महत्व बताया जाएगा। दूसरे दिन धु्रव चरित्र। तीसरे दिन नरसिंह व वामन अवतार। चैथे दिन रामावतार व नन्दोत्सव। पांचवे दिन गौवरधन लीला। छठे दिन रुकमणि मंगल। सातंवे दिन सुदामा चरित्र एवंम परिक्षित मोक्ष की कथा सुनाकर प्रसाद वितरण कर कथा विश्राम और 30 सितम्बर को हवन पूर्णाहूति होगी।
यदि आयोजन स्थल पर पहुँचाने में किसी तरह की कोई कठिनाई आए तो मोबाईल फोन नम्बर 9810234094 पर  या फिर एक एनी नम्बर 9868005599 पर सम्पर्क करके समय का समाधान पाया जा सकता है।  Sat, Sep 22, 2012 at 1:42 PM
23 से 29 सितम्बर तक विशेष आयोजन रोहिणी, दिल्ली में 
नई दिल्ली:तुलसी संस्था के सौजन्य और सतगुरू दर्शन धाम के सहयोग से दिनांक 23 से 29 सितम्बर 2012 तक श्री हनुमान मंदिर, सैक्टर-6 रोहिणी, दिल्ली-85 में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। श्री अरविंद जी महाराज कथाव्यास होंगे। कथा दोपहर 3 बजे से प्रभु इच्छा (6 बजे) तक चलेगी। कार्यक्रम में दिगंबर नागा बाबा मांट मथुरा, महाराज चड़विंदा दास, श्री कंत महाराज एवंम देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले सर्वधर्म के संत महात्मा शिरकत करेंगे।तुलसी  की महासचिव कंचन गुप्ता और एक एनी वरिष्ठ पदाधिकारी अंकित राज गुप्ता की और से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कार्यक्रम का शुभारम्भ सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा मंगल कलश यात्रा (23 सितम्बर प्रातः 8 बजे) द्वारा किया जायेगा। सतगुरू दर्शन धाम की संगत निशान साहब के साथ यात्रा में शामिल होगी। पहले दिन कथा का महत्व बताया जाएगा। दूसरे दिन धु्रव चरित्र। तीसरे दिन नरसिंह व वामन अवतार। चैथे दिन रामावतार व नन्दोत्सव। पांचवे दिन गौवरधन लीला। छठे दिन रुकमणि मंगल। सातंवे दिन सुदामा चरित्र एवंम परिक्षित मोक्ष की कथा सुनाकर प्रसाद वितरण कर कथा विश्राम और 30 सितम्बर को हवन पूर्णाहूति होगी।
यदि आयोजन स्थल पर पहुँचाने में किसी तरह की कोई कठिनाई आए तो मोबाईल फोन नम्बर 9810234094 पर  या फिर एक अन्य नम्बर 9868005599 पर सम्पर्क करके समय का समाधान पाया जा सकता है।