Thursday, February 28, 2013

डाक नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए 532 करोड़ रुपये

28-फरवरी-2013 15:19 IST
राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान के लिए अतिरिक्‍त 200 करोड़ रुपये का प्रस्‍ताव
वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम ने आज लोकसभा में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि वर्तमान वर्ष में राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान 50 करोड़ रुपये के सामान्‍य आवंटन के साथ आरंभ किया गया था। पंचायती राज संस्‍थाओं में क्षमता निर्माण की महत्‍ता को ध्‍यान में रखते हुए 2013-14 में पंचायती राज मंत्रालय के लिए 455 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसके अलावा 200 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया गया है। श्री चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने 4,909 करोड़ रुपये की लागत पर डाक नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी प्रेरित महत्‍वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। डाकघर बुनियादी बैंकिंग समाधान का हिस्‍सा बन जाएंगे और साथ-साथ बैंकिंग सेवाएं भी प्रदान करेंगे। वित्‍त मंत्री ने 2013-14 में इस परियोजना के लिए 532 करोड़ रुपये देने का प्रस्‍ताव किया है। 

वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार गदर आंदोलन की शताब्‍दी मनाने के लिए सरकार सेन-फ्रांसिस्‍को में गदर स्‍मारक को संग्रहालय एवं पुस्‍तकालय में बदलने के लिए धनराशि देगी। (PIB)

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मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/ सुधीर/संजीव/इन्‍द्रपाल/बि‍ष्‍ट/ शदीद/सुनील/शौकत/मनोज- 772

Friday, February 22, 2013

एड्स जागरूकता के लिए रे‍ड रिबन एक्‍सप्रेस

22-फरवरी-2013 14:27 IST
23 राज्‍यों में 162 स्‍टेशनों पर 1.14 करोड़ लोगों को कि‍या जागरूक 
File Photo Punjab Screen
रेड रिब्‍बन एक्‍सप्रेस के तृतीय चरण की शुरूआत 12-1-2012 को की गयी थी। तब से प्रदर्शनी वाली इस रेल गाड़ी ने 23 राज्‍यों में 162 स्‍टेशनों पर ठहरकर 1.14 करोड़ लोगों को एड्स के खिलाफ जागरूक कि‍या है। रेलगाड़ी पर चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्देश्‍य एड्स के खिलाफ चौकसी बरतने और इससे बचने के उपायों का प्रचार करना, एड्स मरीजों के प्रति भेदभाव न करने और इस बीमारी के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। 
प्रथम चरण के दौरान 62 लाख लोगों ने यह प्रदर्शनी देखी, 68 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया गया, जो इस बीमारी बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। 57 हजार से ज्‍यादा लोगों को एचआईवी के बारे में सलाह दी गई। यह जानकारी आज लोक सभा में स्‍वाथ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री श्री एस. गांधीसेल्‍वन ने एक प्रश्‍न के लि‍खि‍त उत्‍तर में दी। (PIB)
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मीणा/शुक्‍ल/ संजना- 683

Thursday, February 7, 2013

संसद के बजट सत्र

07-फरवरी-2013 12:37 IST
पंद्रहवीं लोकसभा के तेरहवें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत और अवधि 
                                                                                                                         Courtesy Photo
संसद के बजट सत्र -2013 की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

पंद्रहवीं लोक सभा के 13वें सत्र और राज्य सभा के 228वें सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2013, गुरुवार से होगी और सरकारी कामकाज की अनिवार्यताओं के अध्याधीन 10 मई 2013, शुक्रवार को इस सत्र के समापन की संभावना है। 

राष्ट्रपति 21 फरवरी 2013, गुरुवार को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रुप से नई दिल्ली स्थित संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में सुबह 11 बजे संबोधित करेंगे। 

मंत्रालयों/विभागों के अनुदान की मांगों पर स्थायी समिति द्वारा विचार और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 मार्च 2013 को दोनों सदनों को अवकाश के लिए स्थगित किया जाएगा और 22 अप्रैल 2013 को सदन का सत्र पुनः आरंभ होगा। (PIB)

वि.कासोटिया/सुधीर पी. /विजयलक्ष्मी – 469

संसद के बजट सत्र 

Sunday, February 3, 2013

भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया

01-फरवरी-2013 15:23 IST
दो फ्रिगेट 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत        रक्षा पर विशेष लेख  
आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान *हामिद हुसैन
    भारतीय तटरक्षक 01 फरवरी, 2013 को अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी स्‍थापना के बाद से यह सेवा एक बहुआयामी और एक उत्‍साहपूर्ण बल के रूप में यह उभरी है जो बहु-भूमिका वाले पोतों और विमानों की तैनाती कर हर समय भारत के समुद्री क्षेत्रों की चौकसी करता है।
    भारतीय नौ-सेना के दो फ्रिगेट और सीमा शुल्‍क विभाग के 5 नावों की मामूली सूची से शुरूआत कर आज इस सेवा बल के पास 77 पोत और 56 विमान हैं। गत वर्ष के दौरान एक प्रदूषण नियंत्रण पोत, 6 गश्ती पोत, 4 वायु कुशन पोत, 2 इंटरसेप्‍टर नौकाएं शामिल की गई हैं। इसके अतिरिक्‍त क्षेत्रीय मुख्‍यालय (एनई) की स्‍थापना तथा 8 सीजी स्‍टेशन का सक्रियण, सक्रियण/3 सीजी स्‍टेशनों की शुरूआत की योजना 2013 के प्रारंभ में की गई है।
    भारतीय तटरक्षक आज तीव्र विस्‍तार की राह पर है। इसमें आधुनिक स्‍तर के पोत, नौकाएं और विमान का निर्माण विभिन्‍न शिपयार्ड/ सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम में किया जा रहा है और भविष्‍य में तटरक्षक अकादमी की स्‍थापना की जाएगी। तटरक्षक के संगठनात्‍मक ढाँचे में 5 क्षेत्रीय मुख्‍यालय, 12 जिला मुख्‍यालय, 42 स्‍टेशन तथा सभी भारतीय तटों पर 15 एयर यूनिट कार्य कर रहे हैं।
    श्रम शक्ति की दृष्टि से इस सेवा ने सामान्‍य ड्यूटी में महिला अधिकारियों के लिए अल्‍प सेवा नियुक्ति की शुरूआत, मेधावी अधीनस्थ अधिकारियों को विभागीय पदोन्‍नति और विशेष नियुक्ति अभियान चलाकर अपने श्रम शक्ति में विस्‍तार किया है।
    बृहत विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और तट रक्षा पर सतत निगरानी के लिए औसतन 20 पोत और 8-10 विमान तैनात किए गए है। भारतीय तटरक्षक ने तटीय निगरानी नेटवर्क (सीएसएन) की भी स्‍थापना की है जिसमें तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और 46 सुदूर स्‍थलों पर इलेक्‍ट्रो ऑप्‍टीक सेंसर शामिल है। इन सेंसरों में 36 मुख्‍य क्षेत्र में, 6 लक्ष्‍यद्वीप समूह और 4 अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में लगाएं गए हैं।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा तट के आस-पास के गाँवों में नियमित समुदाय संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य मछली पकड़ने वाले समुदायों को मौजूदा सुरक्षा स्थितियों के बारे में जागरूक करने के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने के लिए उन्‍हें सतर्क रखना है। इसके अतिरिक्‍त गत वर्षों के दौरान भारतीय तट रक्षक ने 20 तटीय सुरक्षा अभ्‍यास और 21 तटीय सुरक्षा अभियान चलाया है।
    भारतीय तटरक्षक द्वारा हर समय भारतीय खोज और बचाव क्षेत्रों में समुद्री जांच और बचाव किया जाता है। इस कठिन परिस्थिति में साहस दिखाते हुए पिछले वर्ष तटरक्षरक ने 204 लोगों की जान बचाई है। इस अवधि के दौरान भारतीय तटरक्षक द्वारा कुल 30 चिकित्‍सा बचाव किए गए।
    भारतीय तटरक्षक ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी अपनी पहचान स्‍थापित की है। सहयोग समझौता/ ज्ञापन के तहत संस्‍थागत यात्राएं नियमित की जाती हैं। 12वीं भारत-जापान तटरक्षक उच्‍च स्‍तरीय बैठक जापान के टोक्‍यो में जनवरी, 2013 में की गई। अक्‍तूबर, 2012 में नई दिल्‍ली में 8वां एशियाई तटरक्षक प्रमुखों का सम्‍मेलन आयोजित किया गया। यह सम्‍मेलन काफी महत्‍वपूर्ण था क्‍योंकि इसे पहली बार भारत में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्‍त, भारत-पाकिस्‍तान संयुक्‍त कार्य समूह बैठक का आयोजन पहली बार नई दिल्‍ली में जुलाई, 2012 में किया गया।
    भारतीय तटरक्षक लगातार अपना विस्‍तार कर रहा है और जिससे इसकी क्षमता में और विकास हो रहा है। सक्षम और पेशेवर अधिकारियों द्वारा आधुनिक पोतों और विमानों का संचालन किया जा रहा है जो देश सेवा और समुद्री सुरक्षा में कार्य कर अपने को गौरवान्वित महसूस करते है। वर्ष 2013 के लिए भारतीय तटरक्षक का शीर्षक है 'समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित लक्ष्‍य'। यह शीर्षक इस सेवा की प्रतिबद्धता और संकल्‍प को प्रदर्शित करता है जो इसके आदर्श वाक्‍य 'वयम् रक्षाम:' में प्रतिबिम्‍बित है जिसका अर्थ है 'हम रक्षा करते है'। (PIB) (पसूका) 
*एपीआरओ (रक्षा) भारतीय तटरक्षक ने समुद्री सुरक्षा पर ध्‍यान केंद्रित किया 
मीणा/आनंद/लक्ष्‍मी - 33
पूरी सूची - 01.02.2013

Wednesday, January 9, 2013

प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक

उद्देश्‍य विभिन्‍न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना
विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने लिया भाग
प्रधानमंत्री डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक कल कोच्चि में हुई। विश्वभर से 13 प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों ने इसमें भाग लिया। बैठक में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि, वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री श्री आनंद शर्मा, विदेश मंत्री श्री सलमान खुर्शीद, मानव संसाधन मंत्री श्री एम.एम. पल्‍लम राजू, योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष डॉक्‍टर मोंटेक सिंह आहलुवालिया और केन्‍द्र सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। 

बैठक में जिन प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया, उनमें श्री करण एफ. बिलीमोरिया, श्री स्‍वदेश चटर्जी, सुश्री इला गांधी, लॉर्ड खालिद हमीद, डॉक्‍टर रेणु खाटोर, श्री किशोर मधुबनी, श्री एल.एन. मित्‍तल, लॉर्ड भीखु छोटालाल पारेख, श्री सैम‍पितरोदा, तान श्री दातो अजीत सिंह, श्री नेविले जोसफ रोस, प्रोफेसर श्रीनिवास एस.आर.वर्धन और श्री युसूफाली एम.ए. शामिल थे। 

बैठक में प्रतिभागियों ने महत्‍वपूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों और भारत पर होने वाले उनके प्रभावों के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। इनमें वैश्विक आर्थिक स्थिति, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं, ऊर्जा सुरक्षा और एशिया प्रशांत क्षेत्र में प्रवृत्तियां जैसे मुद्दे शामिल थे। सदस्‍यों ने भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच तथा भारत और विभिन्‍न देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के बारे में भी अपने विचार प्रस्‍तुत किये। 

प्रधानमंत्री ने उनके दृष्टिकोण और रचनात्‍मक सुझावों के लिए सदस्‍यों का धन्‍यवाद किया। 

प्रधानमंत्री की प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद का गठन वर्ष 2009 में हुआ था और हर साल इसकी बैठक होती है। इसका उद्देश्‍य दुनिया भर में फैले विभिन्‍न क्षेत्रों के प्रसिद्ध प्रवासी भारतीयों के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाना है, ताकि भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच सम्‍पर्कों के लिए व्‍यापक एजेंडा तैयार किया जा सके।(PIB) 
09-जनवरी-2013 12:52 IST
कोच्चि में प्रवासी वैश्विक सलाहकार परिषद की बैठक
मीणा/राजगोपाल/गीता-97

Sunday, January 6, 2013

सिक्किम की सुगंध-टेमी चाय

03-जनवरी-2013 14:58 IST
दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया 
टेमी चाय पर विशेष लेख                                                         * खगेन्‍द्रमणि प्रधान
                                                                                                                                  Courtesy Photo
आकर्षक और भव्‍य माउंट कंचन ज़ोंगा की पृ‍ष्‍ठभूमि में तीस्‍ता नदी की सुहावनी समीर के साथ सिक्किम हर सुबह टेमी चाय का आनंद लेता है। 4500 से 6,316 फुट की ऊंचाई पर फैली ढलान वाली 180 हेक्‍टेयर भूमि में टेमी चाय के बागान हैं, जहां बहुत ही बढ़िया परम्‍परागत चाय की पैदावार होती है, जिसकी चाय के कदरदान तारीफ करते नहीं थकते।
    टेमी चाय बागान की स्‍थापना सिक्किम के पूर्व नरेश चोग्‍याल के शासनकाल में 1969 में हुई थी और बड़े पैमाने पर इसका उत्‍पादन 1977 में शुरू हुआ। चाय बागान के रोजमर्रा के काम-काज को व्‍यवस्थित रखने के लिए 1974 में चाय बोर्ड की स्‍थापना की गई और बाद में यह सिक्किम सरकार के अंतर्गत उद्योग विभाग की सहायक कम्‍पनी बन गई। टेमी चाय से जहां एक ओर 4 हजार से अधिक श्रमिकों और 30 कर्मचारियों को सीधे रोजगार मिलता है, वहीं यह कम्‍पनी सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाली एक बड़ी कम्‍पनी बन गई है।
    हल्‍की ढलान वाली यह भूमि तेंदोंग पर्वत श्रृंखला से शुरू होती है। 30-50 प्रतिशत ढलान वाली दुम्‍मट मिट्टी की यह भूमि चाय बागान के लिए बहुत ही उपयुक्‍त है और यहां साल में लगभग 100 टन चाय की पैदावार होती है। यदि बड़े चाय बागानों से मुकाबला किया जाए, तो यह पैदावार बहुत ज्‍यादा नहीं है, लेकिन इसकी गुणवत्‍ता और सुगंध ने भारत और दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया है।
    टेमी चाय बागान में पैदा हुई चाय को ''टेमी चाय'' जैसे कई ब्रांड नामों से पैक किया जाता है, जो सबसे बढ़िया क्‍वालिटी की चाय होती है, जिसमें सुनहरी फूलों जैसी नारंगी झलक वाली बढि़या काली चाय होती है। इसके बाद दूसरी बढ़िया चाय का लोकप्रिय ब्रांड नाम है 'सिक्किम सोलजा' और उसके बाद 'मिस्‍टीक चाय' और 'कंचनजंगा' चाय का नाम आता है। इसे 'ऑर्थोडोक्‍स डस्‍ट टी' के नाम से बेचा जाता है। चाय की लगभग 70 प्रतिशत पैदावार अधिकृत दलाल के माध्‍यम से कोलकाता में सार्वजनिक नीलामी से बेची जाती है और बा‍की की चाय के रिटेल (खुदरा बिक्री के लिए) पैकेट बनाए जाते हैं और स्‍थानीय बाजार में बेचे जाते हैं।
    चाय बागान की भूमि की भौगोलिक स्थिति और चाय के पौधों को जैविक खाद से पोषित करने से इस चाय बागान में पैदा होने वाली चाय के पत्‍तों की कीमत और सुगंध और बढ़ जाती है।
    टेमी चाय बागान ने स्विटज़रलैंड की बाजार नियंत्रण से संबंधित संस्‍था-आईएमओ  के निर्देशों का पालन किया और पर्यवेक्षण की अवधि पूरी होने के बाद आईएमओ इंडिया ने, जो आईएमओ स्विटज़रलैंड का सदस्‍य समूह है, 2008 में टेमी चाय बागान को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक का प्रमाण पत्र दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत भी यह आईएसओ-22,000 मानक के अनुसार एचएसीसीपी द्वारा भी परमाणीकृत चाय बागान है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार पहुंचने वाला उत्‍पाद उत्‍तम गुणवत्‍ता वाला है। यह भी उल्‍लेखनीय है कि टेमी चाय बागान को लगातार दो वर्षों से भारतीय चाय बोर्ड ने भी अखिल भारतीय गुणवत्‍ता पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया है।
    चाय उत्‍पादन की पूरी प्रक्रिया को परंपरागत से ऑर्गेनिक में बदलने से न केवल इसके लिए अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है, बल्कि सिक्किम जाने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्‍या में इसकी मांग करते हैं। चाय की ऑर्गेनिक खेती के लिए जैविक खाद और वर्मिन-कम्‍पोस्‍ट खाद, नीम और अरंण्‍डी की बट्टियों के रूप में कीटनाशक भी उपलब्‍ध होते हैं। चाय बागान के पास लगभग 100 एकड़ वन भूमि भी है, जिससे बड़ी मात्रा में चाय बागान के लिए जैविक खाद-पदार्थों की पूर्ति हो जाती है, जो इसे आवश्‍यक संसाधनों की दृष्टि से आत्‍मनिर्भर बनाता है।
    खेती में रासायनिक खादों के इस्‍तेमाल को छोड़कर पैदावार के ऑर्गेनिक तरीके अपनाने से न केवल टेमी चाय बागान की उत्‍पादन लागत कम हुई है, बल्कि हानिकारक रसायनों से मुक्‍त ऑर्गेनिक पैदावार को पसंद करने वालों का एक बहुत बड़ा बाजार भी मिल गया है। टेमी चाय बोर्ड को अपनी सफलता पर गर्व है और वह सरकारी राजस्‍व में भी पर्याप्‍त योगदान दे रहा है।
    जर्मनी, ब्रिटेन, अमरीका और जापान टेमी चाय के प्रमुख खरीददार हैं। ग्रीन टी की बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें विविधता लाने के कई प्रयास किए जा रहे है और इसकी कीमत बढ़ाने के लिए अधिक आकर्षक डिज़ाइन वाले पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा सिक्किम की इस चाय के लिए विदेशी बाजार में सीधे खरीददार बनाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। चाय बोर्ड ने कनाडा और जापान को ऑर्गेनिक चाय के छोटे पैकेट सीधे निर्यात करना भी शुरू कर दिया है, जहां इसके लिए स्‍पर्धात्‍मक और आकर्षक दाम मिल रहे हैं।
    चाय बागान के विस्‍तार के लिए उपयुक्‍त भूमि न मिलने से इसके क्षेत्र का विस्‍तार नहीं हो पा रहा है। लेकिन टेमी चाय बागान छोटे किसानों और उत्पादकों को बढ़िया पौध और अन्‍य तकनीकी जानकारी की सहायता उपलब्‍ध करा रहा है। बागान की नर्सरी में बढ़िया पौध तैयार की जाती है, जिसका वितरण राज्‍य के छोटे चाय बागानों की सहकारिताओं में किया जाता है।
    हालांकि टेमी चाय चाय पारखियों की उम्‍मीदों पर खरी उतरी है, फिर भी चाय बागान की जलवायु संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए यहां अधिक कीमत वाली और बढि़या चाय पत्‍तों वाली पैदावार की अभी भी गुंजायश है।
            (PIB)       (पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)सिक्किम की सुगंध-टेमी चाय
*फ्रीलांस पत्रकार
नोट: लेखक द्वारा इस लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार आवश्‍यक नहीं कि पत्र सूचना कार्यालय के विचारों से मेल खाते हों।

 सिक्किम स्क्रीन में भी देखें 
  
मीणा/राजगोपाल/लक्ष्‍मी-03